मुलाकात…

राह में मिलते हैं, हम रोज़ उनसे

न वो कुछ कहते हैं, न हम कुछ कहते हैं
फैसला करते हैं हर रोज़ घर जाके। 
कल जो मिले तो,देखिए हम क्या क्या कहते हैं ।
आते हैं जब वो सामने,लग जाते हैं ज़बाँ पर ताले ,
गुज़र जाते हैं वो, हम कुछ न कहते हैं।  
किस्मत से मिले वो जब तन्हा हमको 
सोचते रह गये, अब कहते हैं,अब कहते हैं।

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