चाँदनी रात..

​चाँदनी रात में, एक सुरीला स्वर गूँजता है 

एक मृदु सशक्त स्वर,

भावनाओं से ओतप्रोत  

मेरे दिल में उतरता है। 

मेरे कानों से होकर  

    …मेरे कानों से होकर ,

मेरे हृदय में आकर    

मेरी सोई हुई भावनाओं को

अद्भुत ढंग से जगाने लगा है 

मैं रुकी हूँ ,

जब तक इस स्वरलहरी की  

अंतिम कड़ी पूरी न हो जाए। 

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4 thoughts on “चाँदनी रात..

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