बुझता चिराग…

मर भी गया तो तेरी यादों में रहूँगा

इक झोंका हूँ हवा का,तुझे छू के गुज़र जाऊंगा
खफ़ा नहीं हूँ तुझसे न गिला है कोई

बहार आने से पहले गुजर जाऊँगा इधर से मैं
बहुत उदास बड़ी ख़ामोश है रात

तारों की छाँव में एक बार तुझे देखने आऊँगा 
वक्त-ए रुख़सत न आना मेरी कब्र पे तुम

बुझता हुआ चिराग हूँ, यूं ही मिट जाऊँगा।।।

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