कसक…

वो एक पल मेरा ख्व़ाब था

या मेरी आँखों में ख़ुमार था
क्यों दिल मेंं मेरे कसक सी थी
क्यों आँखों में गर्द-ओ-गुबार था

न मलाल कर ये ख़ता है तेरी

इक ख़्वाब था जो बिखर गया
वो अश्क था तेरी आँख का
तेरी आँख से जो उतर गया

न लौट कर अब आयेगा 
वो गुजर  गया तो गुजर गया ।

कब मिले थे मुझे ये ख़्याल नहीं
मेरी रूह को छूके कोई गुजर गया ।

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