मैं नदिया सी…

अच्छा लगता है तुम्हारे साथ चलना पगडण्डियों पर

गीली सी मिट्टी और हवा में नमी सी

कुछ क़तरे तुम्हारी मुहब्बत के

कुछ मेरी बातें अनकही सी

तुम्हारा ढेरों बातें करना

और मेरे दिल की नासमझी

पैरों के नीचे की ठंडक

दिल में उतरती सी

ठंडी हवा के झोंके में

मेरी चुनरी तुमसे लिपटती सी

अनजाने ही मेरा हाथ तुम्हारा पकड़ लेना

तुम्हारी उँगलियाँ मेरे हाथों में कसती सी

वो लंबी पगडण्डी अपने में सिमटती सी

उन सर्द हवाओं में अपनी मुहब्बत मचलती सी

वो दिन हों और साथ हो तुम

तमन्ना दिल में उभरती सी

मैं माँगू और तुम मिल जाओ

दुआ ये दिल से निकलती सी

कहाँ से गुज़रूँ किधर को जाऊँ

समन्दर से तुम ,मैं नदिया सी

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