इतिहास के दस्तावेज़…(5)

भारत का रेशमी कपड़ा इतना बढ़िया था ,कि इसकी माँग सारे यूरोप में थी ईस्ट इंडिया कंपनी रेशमी कपडा इंग्लैंड तथा अन्य देशों में बेचकर मालामाल होती गयी ।

हिन्दुस्तानी कारीगरों के मुक़ाबला इंग्लैंड के कारीगर नहीं कर पा रहे थे ,तो उन्होंने रेशमी वस्त्रों के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाया ,जिसका परिणाम ये हुआ कि भारतीय रेशमी कपड़ों पर रोक लग गयी ,तो कंपनी ने कच्चा रेशम इंग्लैंड ले जाना शुरू किया लेकिन वे ये भी नहीं चाहते थे ,कि भारतीय कारीगर अपना रेशम का कारोबार जारी रखे कंपनी ने भारत में अपने प्रतिनिधियों को आदेश दिया कि जो लोग रेशम का कपड़ा तैयार करते है ,उन्हें कंपनी की फ़ैक्टरी में काम करने को बाध्य किया जाये और जो विरोध करे उनके लिये कठोर दंड की व्यवस्था की जाये ।

इस नीति का ब्रिटिश पार्लियामेंट की सलेक्ट कमेटी ने पूरा समर्थन किया उन्होंने आदेश दिया भारत से कच्चा रेशम ब्रिटेन लाया जाये और रेशमी कपड़े ब्रिटेन में तैयार किये जाये ।

इसका असर ये हुआ कि कारीगर बेकार हो गये और वे किसान बन गये या विद्रोहियों के दल में शामिल हो गये।

१८ वीं सदी के अन्तिम तीन दशकों में बंगाल में रेशम पैदा करने के केन्द्र क़ासिम बाज़ार (मुर्शिदाबाद )बोआलिया (राजशाही )जंगीपुर (मुर्शीदाबाद )मालदा ,राधानगर( हुगली) थे।

अंग्रेज़ों ने देखा कि बंगाल से कच्चा रेशम लाकर वे इटली या स्पेन के साथ प्रतियोगिता कर सकते हैं ।

इसलिये उन्होंने वाइस नामक रेशम बनाने वाले को भारत भेजा वो अपने साथ चार कारीगरों को लाया ,जिन्होंने भारतीय कारीगरों को ज़्यादा अच्छी तरह से रेशम का सूत निकालना सिखाया ।

अब कंपनी भारत से हर साल ७,२०० मन कच्चा रेशम इंग्लैंड भेजने लगी १७९० में कंपनी के राजशाही एजेंट को १५४९१ रु ,राधानगर के एजेंट को १७,०८२ रु ,रंगपुर के एजेंट को ११,१०४ रु ,कुमारखाली के एजेंट को २०,०१६ रु ,जंगीपुर के एजेंट को १८,२६२ रु ,कमीशन मिला जब कि कंपनी एक मन सूत तैयार करने के लिये

राजशाही में सिर्फ़ ३५ रु ख़र्च करती थी ।

रेशम के कारीगरों का शोषण कंपनी राज में पूरे जोरशोर से चल रहा था जिस कारण कारीगरों में असंतोष फैल गया उन्होंने कंपनी का काम बंद कर अधिक मज़दूरी की माँग की ।

कई कारीगर तो काम छोड़ कर भाग गये और कई ने अपने अंगूठे काट लिये परन्तु कंपनी ने राजसत्ता का प्रयोग कर भारतीय कारीगरों की आवाज़ दबा दी गयी

और इस तरह विरोध ख़त्म कर दिया गया ।

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