इतिहास के दस्तावेज़…(7)

अंग्रेज़ सरकार ने १८५७ के आरंभ में एनफील्ड रायफ़ल्स और उनके सुअर तथा गाय की चरबी लगे कारतूस जारी किये ,इन कारतूसों को दातों से पकड़ कर रायफ़ल्स से निकालना पड़ता था ,हिन्दू और मुस्लिम सिपाहियों ने इसे अपना धर्म नष्ट करने की चाल समझा ,और इसके ख़िलाफ़ हो गये ।

२२ जनवरी १८५७ को बैरकपुर की छावनी में सिपाहियों ने जहाँ चरबी वाले कारतूस रखे थे वहाँ आग लगा दी ,इसके बाद आगज़नी की घटनायें कई जगहों पर हुई ।

बैरकपुर में चौतीसवीं पलटन विद्रोह के पक्ष में थी इसी पलटन में सिपाही मंगल पांडे भी थे ।२९ मार्च १८५७ को मंगल पांडे ने अंग्रेज़ अफ़सर को गोली मार दी और दूसरा अफ़सर आया तो उसे तलवार से मौत के घाट उतार दिया मंगल पांडे को गिरफ़्तार कर लिया गया और,

८ अप्रैल को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गयी ।

३१ मई १८५७ को पूरे देंश में एकसाथ विद्रोह करना तय हुआ ,परन्तु मेरठ में १० मई को ही विद्रोह हो गया ।

शुरू में विद्रोहियों को सफलता मिली मेरठ से चलकर उन्होंने दिल्ली पर अधिकार कर लिया ।और बहादुरशाह द्वितीय को सम्राट घोषित कर दिया ।अगले दो महीनों में यह विदरोह अवध और रूहेलखंड में भी फैल गया ,और नसीराबाद। ,ग्वालियर ,बरेली ,लखनऊ ,बनारस कानपुर की छावनियों में भी फैल गया सभी ओर से विद्रोही दिल्ली को चल पड़े ।

इस विद्रोह की कई वजह थी डलहौज़ी की राज्य हड़पने की नीति से भारतीय शासक नाराज़ थे और अपना राज्य बचाने के लिये तत्पर थे ।

पेशवा बाज़ीराव दिवतीय के दत्तक पुत्र नाना साहब और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने विद्रोह के पक्ष में थे ,रानी लक्ष्मीबाई ने मरते दम तक अंग्रेज़ों से युद्ध करती रही ।

पहले पहल विद्रोहियों को सफलता मिली परन्तु

यह विद्रोह सैनिकों तक ही सीमित था हर एक दल का नेतृत्व अलग अलग हाथो में था । तात्या टोपे जो नाना साहब का सेनापति था बंदी बना लिया गया ,झाँसी की रानी को वीरगति प्राप्त हुई ,बहादुरशाह को बंदी बनाकर रंगून भेज दिया और उनके पुत्रों को निर्ममता से मार दिया गया।

अंग्रेज़ों की सत्ता सिक्खों ,गोरखों और दक्षिण भारत की सैनिक छावनियों से लाये गये सैनिकों द्वारा फिर से स्थापित हो गयी ।

लक्ष्य हीनता और योग्य नेतृत्व के अभाव में ये विद्रोह सफल न हो सका ।

१४ सितंबर को दिल्ली पर अंग्रेज़ों का पुन: अधिकार हो गया ,८जुलाई १८५८ को लार्ड कैनिंग ने विद्रोह की समाप्ति और शांति स्थापना की घोषणा कर दी ।

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5 thoughts on “इतिहास के दस्तावेज़…(7)

  1. पोस्ट काफी अंतराल के बाद डालते हैं ..कृपया रेगुलर पोस्ट डालें आपकी पोस्ट का इंतजार रहता है ..✍️😎👍

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