दक्षिण भारतीय इतिहास…(१७)

गोविंद तृतीय की मृत्यु के बाद शासन के लिहाज़ से अमोघ वर्ष ,उसका पुत्र बहुत छोटा था फिर भी उसे राज सिंहासन पर आसीन कराया गया और उसका संरक्षक गोविंद तृतीय के छोटे भाई इन्द्र का पुत्र कर्क सुवर्ण वर्ष को बनाया गया ।

अमोघ वर्ष को कम उम्र के कारण उसके संम्बधियो और सामन्तों ने विद्रोह कर दिया और उसके हितैषियों को मार दिया तथा अमोघ वर्ष को गद्दी से हटा दिया ।

परन्तु कर्क सुवर्ण वर्ष ने विद्रोहियों को पराजित कर अमोघ वर्ष प्रथम को दुबारा राजगद्दी पर आसीन कराया ।

गोविंद तृतीय ने वेंगी राजा विजयादित्य को पराजित कर उसके भाई भीमसालुकि को राजगद्दी पर बैठाया था , अत: गोविंद तृतीय की मृत्यु के बाद उसने वेंगी परअधिकार कर अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी । काफ़ी वर्षों के संघर्ष के बाद अमोघ वर्ष प्रथम ने चालुक्यो को पराजित किया ।

अमोघ वर्ष की उम्र को देखकर गंगराज्य के शिवमार ने भी गंग राज्य की स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी फलत: अमोघ वर्ष प्रथम ने गंग राज्य में अपना सामन्त नियुक्त कर दिया जिसने शिवमार को पराजित कर उसकी हत्या कर दी ।फिर भी गंगराज्य और राष्ट्र कूट के बीच संघर्ष होता ही रहा ।जिसका अंत अमोघ वर्ष प्रथम ने अपनी दो पुत्रियों का विवाह गंगनरेश एरेयंग और उसके पुत्र वूतुग से करके मैत्री सम्बंध स्थापित किया ।

अमोघ वर्ष ने ८१४ई० से ८८०ई० तक राज्य किया और अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखा ।

अमोघ वर्ष कन्नड़ और संस्कृत भाषाओं का ज्ञाता था ।

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