मूल कर्त्तव्य 🇮🇳

४२वें संविधान संशोधन अधिनियम (१९७६) द्वारा दस मूल कर्त्तव्यों को जोड़ा गया ।

अनुच्छेद ५१ क के अनुसार भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य होगा कि वह :

1. संविधान का पालन करे और उसके आदर्शो ,संस्थाओं ,राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान काआदर करे ।

2. स्वतंत्रता के लिये हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को ह्रदय में संजोये रखे और उनका पालन करे ।

3. भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करेऔर उसे अक्षुण्ण रखे ।

4. देश की रक्षा करे और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करे ।

5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म ,भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभाव से परे हों,ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध हैं ।

6. हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करें।

7. प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन,झील ,नदी और वन्य जीव है ,रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें ।

8. वैज्ञानिक दृष्टि कोण मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें ।

9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें ।

10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुये प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले ।

11. 6 से 11 वर्ष तक की उम्र के बीच अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना।

12. यह कर्त्तव्य 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम २००२ के द्वारा जोड़ा गया ।

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