इक छोटी सी दुआ …

तुम्हारे लिये प्रार्थना की

बहुत लोगों ने

कुछ जो तुम्हें जानते है

कुछ अनजाने भी

कुछ तुम्हारे सामने भी हाथ उठाये

खड़े थे

कई ऐसे भी थे

जिन्हें तुमने देखा भी नहीं

कुछ ऐसे जो तुम तक

पहुँचे भी नहीं

उन्हीं अनजाने और अनचीन्हे में

मैं भी हूँ

जिसने हर घड़ी

तुम्हारे लिये हर पल

चाहा सब कुछ

कुछ बहुत अच्छा

उन प्रार्थनाओं में है

इक छोटी सी दुआ

मेरी भी

तुम्हारे लिये ….।

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क्या है प्यार…

प्यार क्या है एक आश्वासन

या सिर्फ़ इन्तज़ार

या किये गये कुछ वादे

जो पूरे होगे

पता नहीं

या वक़्त के साथ

धुँधली पड़ती यादें

चन्द पलों का साथ

फिर राहें जुदा जुदा

किसी का क़रीब से उठ जाना

और न आना कभी

या कि

ज़िन्दगी में आके न जाना कभी

क्या है प्यार

एक आश्वासन इक इन्तज़ार

कोई वादा या

एक एहसास …।

दरख़्तों की छांव में …

आज फिर मैंने दरख़्तों पर तुम्हारा नाम लिखा है

भीगे भीगे मौसम ने फिर तुम्हें याद किया है

फिर तन्हाई ने जगाये ख़्वाब पुराने

फिर तेरी याद आयी है ज़ख़्मों को सहलाने

फिर वादियों में गूँजे हैं तेरे प्यार के नग़मे

और फिर उभरे हैं वही ज़ख़्म पुराने

तेरी ही याद में डूबी है वादियाँ

हवाओं में हैं आज भी वही तेरे मेरे तराने

दिल ढूँढता है तुम्हें इन्हीं दरख़्तों की छांव में

फिर मैंने दरख़्तों पर तुम्हारा नाम लिखा है

दस्तक…

यादों ने एक बार दिल पे दस्तक सी दी है

हर किसी से तेरा पता पूछा हमने

इश्क़ की मेरे सबने मुख़ालफ़त की है

बर्फ़ पे बने थे जो निशाँ हमारे पाँवों के

सर्द हवाओं ने भी आज बग़ावत की है

जब भी किसी ने इश्क़ का नाम लिया है

हमने भी तेरा नाम सुबह शाम लिया है

सरगोशियों में कभी चीख़ो में

हरबार तुम्हें ही हमने याद किया है

तुम ही कह दो हमारा रिश्ता क्या है

यूँ ही तो नहीं हमने दिल में तुम्हें आबाद किया है

भटकती चाँदनी …

तन्हा हो

तो मिलने के लिये आओ

कभी आवाज़ ही दो

कुछ वक़्त साथ भी गुज़ारे

तुमसे मेरा रिश्ता

ऐसा ही है

कुछ जुदा -जुदा सा

काफ़ी क़रीब सा

बैठे रहेंगे यूँ ही

कुछ चुपचाप से

दिल चाहे तो कुछ कहना

वरना आकाश पर देखेंगे

चाँद पूनम का

तुम्हारे रुखसारों पर

भटकती चाँदनी

मेरी आँखों में उतरता चाँद पूनम का

इक शाम…

तेरे नाम से जो लगावट सी लगती है

तू न समझे तो क्या

मुझे तो मुहब्बत ही लगती है

चले आओ एक अहसान ही कर दो

मेरे नाम अपनी इक शाम ही कर दो ।

अहसास -ए-ग़म से मैं किनारा कर लूँ

जो तुम मुहब्बत का एहतराम कर लो

मर जाऊँगा यक़ीनन ख़ुशी से मैं

मिलने का वादा जो एक शाम कर दो

ख़ामोशी…

ख़ामोशी का जवाब ख़ामोशी भी हुआ करती है

कई सवालों का जवाब भी खामोशी हुआ करती है

ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बयाँ होता है

लब ख़ामोश रहे भी तो क्या आँखें कहा करती हैं

ख़ामोशी में ख़ामोशी भी सुना करती है

तुमभी चुप हो मैंने भी कुछ कहा तो नहीं

फिर भी तुमने मेरे दिल का हाल

मैंने तुम्हारे दिल का पता जान लिया

ख़ामोशी से।

क्या कहूँ …

दिन और रात गुज़र जाते हैं

इक पल है मेरी आँखों में

जो अटक गया है

जो बात है

वो तुमसे कहनी है

बड़ी ज़रूरी लगती है

दिल थोड़ा सा तो डरता है

तुम न समझे तो

क्या होगा

मैं कह भी दूँ

तुम न समझो

या न समझने का ढोंग करो

दिल दुख से भर जायेगा

और समझ गये तो

दिल ख़ुशियों से मर जायेगा

करूँ क्या

कहूँ क्या

वो पल

दिल में मेरे

अटक गया है